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मध्य प्रदेश में मुन्नाभाई MBBS का खुलासा, 5 गिरफ्तार

Police investigation and arrests in the Madhya Pradesh fake doctor and MBBS degree scam.

मध्यप्रदेश के दमोह में मध्यप्रदेश फर्जी एमबीबीएस घोटाला का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। यहाँ करीब 5 लाख रुपये में नकली मेडिकल डिग्रियां खरीदकर सरकारी अस्पतालों में नौकरी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने अब तक एनएचएम क्लर्क समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

दमोह से खुला फर्जीवाड़े का राज

मध्यप्रदेश का दमोह जिला एक बार फिर फर्जी डॉक्टरों के काले कारनामों की वजह से चर्चा में है। ताजा मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों का है। यहाँ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को शिकायत मिली थी कि कुछ डॉक्टर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। शुरुआती जांच में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे रैकेट की परतें खोलनी शुरू कर दीं।

5 लाख में डिग्री और सरकारी नौकरी

पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह करीब 5 लाख रुपये लेकर फर्जी एमबीबीएस (MBBS) डिग्रियां तैयार करता था और सिस्टम में पैठ बनाकर सरकारी संस्थानों में नियुक्तियां दिलवाता था। गिरफ्तार आरोपियों में ग्वालियर का कुमार सचिन यादव और सीहोर का राजपाल गौर शामिल हैं, जिन्होंने कबूल किया कि उन्होंने पैसे देकर फर्जी डिग्रियां खरीदी थीं। इनके अलावा जबलपुर से अजय मौर्य नामक एक और कथित डॉक्टर को पकड़ा गया है।

भोपाल और ग्वालियर से जुड़े तार

इस घोटाले के तार प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्वालियर से भी जुड़े हैं। पुलिस ने भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मुख्यालय में तैनात डेटा क्लर्क आदिल सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आदिल सिस्टम के भीतर दस्तावेजों के सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया को आसान बनाने का काम करता था। इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना ग्वालियर निवासी मुकेश चौधरी बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है।

प्रदेश भर में हड़कंप और बर्खास्तगी

इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। एनएचएम ने पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की डिग्री की जांच शुरू कर दी है। अब तक राज्य के विभिन्न जिलों से 9 ऐसे डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है जो फर्जी दस्तावेजों पर काम कर रहे थे। इन सभी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पिछले साल भी एक फर्जी हार्ट सर्जन का मामला सामने आया था, जिसके गलत इलाज से कई मरीजों की जान चली गई थी। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर चयन प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

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