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आम आदमी पार्टी छोड़ी, बीजेपी में शामिल राघव चड्डा

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दिए गए स्रोतों में किसी विशिष्ट "कार्य" को पूरा करने में देरी का कोई प्रशासनिक उल्लेख नहीं है, लेकिन राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के समय (timing) और उनके लंबे जुड़ाव के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं:

  • सिद्धांतों से भटकाव का अनुभव: राघव चड्ढा ने बताया कि उन्होंने पार्टी को अपनी युवावस्था के 15 साल दिए हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वह "सही आदमी हैं, लेकिन गलत पार्टी में हैं" क्योंकि पार्टी अब अपने बुनियादी सिद्धांतों और नैतिकताओं से भटक कर निजी स्वार्थ के लिए काम करने लगी है।

  • पार्टी के भीतर हालिया बदलाव: आम आदमी पार्टी ने इसी महीने की शुरुआत में राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के 'डिप्टी लीडर' के पद से हटाकर अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी दे दी थी, जिस पर चड्ढा ने सवाल उठाए थे।

  • ऑपरेशन लोटस' और जांच एजेंसियों का दबाव: आम आदमी पार्टी (संजय सिंह) का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे 'ऑपरेशन लोटस' है। उन्होंने दावा किया कि अशोक मित्तल के घर "दो-चार दिन पहले" ईडी का छापा पड़ा था और डर दिखाकर इन सांसदों को तोड़ा गया है। संजय सिंह के अनुसार, बीजेपी ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।

  • एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया: स्रोतों से पता चलता है कि राघव चड्ढा 2013 से अरविंद केजरीवाल के साथ थे और उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक थे। उनके अनुसार, उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा तब की जब उन्हें लगा कि पार्टी अब देशहित में काम नहीं कर रही है।

राघव चड्ढा के अनुसार यह निर्णय पार्टी के बदलते मूल्यों के कारण लिया गया एक लंबा व्यक्तिगत विचार-मंथन था, जबकि आम आदमी पार्टी इसे हाल ही में जांच एजेंसियों द्वारा बनाए गए दबाव का परिणाम मानती है

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